क्या हम सही मायने में वर्तमान में जीते हैं?
या तो शरीर किसी काम में व्यस्त होगा या माइंड कोई भविष्य की योजना बना रहा होगा, और या फिर अपने ही भूतकाल में उलझा होगा।
और माइंड का भूत और भविष्य में उलझना ही न जाने बॉडी को कितनी बीमारियाँ दे देता है - BP, Sugar, Anxiety, Restlessness, Anger, Depression जैसी न जाने कितनी बीमारियाँ घर कर जाती हैं।
जिम्मेदार कौन?
माइंड इतना trained हो चुका होता है कि वो किसी न किसी बाहरी कृत्य को इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर सोच की उड़ान बनाए रखता है।
लेकिन कभी सोचा है यदि माइंड ही "नो माइंड" स्टेट में चला जाए तो फिर कैसे anxiety, BP, sugar, restlessness जैसी बीमारियाँ होंगी?
इसी तथ्य के चलते psychiatrist ऐसी बीमारियों के लिए दवाई दे देता है जो कि एक तरीके से माइंड को rest की स्टेट में ले जाती है (कुछ समय के लिए "no mind" स्टेट)।
LSD भी कुछ इसी तरीके से माइंड पर काम करती थी जिसे Stanislav Grof ने 1960 तक बहुत इस्तेमाल किया, लेकिन उस पर प्रतिबंध लगाने के बाद फिर से 2000 से medical science LSD पर काम करने लग गई, ताकि दवाई के जरिये लोगों के माइंड की अवस्था को "नो माइंड" स्टेट में लाया जा सके।
पर समस्या की जड़ को तो खत्म नहीं किया जाता, बल्कि समस्या को समझकर एक व्यावसायिक समाधान परोस दिया जाता है ताकि सबकी रोजी-रोटी चलती रहे।
बिल्कुल ऐसे ही pharma-doctor का पूरा nexus काम करता रहता है।
जबकि समाधान और भी हैं जिनके ऊपर भी Stanislav Grof ने काम किया। और finally वो एक conclusion पर पहुँचा कि "कुछ" है जो कि "मन" से भी परे है, जो इस सब पर "नियंत्रण" रख रहा है।
Western world उस "कुछ" को परिभाषित ही नहीं कर पाया, या कहूँ कि उसे परिभाषित करते ही पूरे Western world की theory Eastern world की theory की तरफ shift हो जाती।
मतलब चेतना, परमात्मा, पुनर्जन्म जैसे सिद्धांतों को एक सहमति देनी पड़ती जो कि पूरी तरीके से Abrahamic religion की नींव को ही हिला देती।
खैर, मुद्दे पर आते हैं कि कैसे हम लोग वर्तमान में जीना सीखें?
लेकिन इस वर्तमान को तो हमने समझा ही नहीं - वर्तमान है भी या नहीं?
जैसे ही शब्द को सुना वो तो भूत बन गया... फिर हम वर्तमान बचा ही कन्हा ?
if I use the theory of "western work" of time then this moment cannot have dimensions of expansion.
यही समस्या है कि हम वर्तमान को समझे ही नहीं और जब वर्तमान को ही नहीं समझा तो उसमें जीना कैसे सीख सकते हैं।
नतीजा ये होने लगा - हवाई सोच माइंड में चलाकर हम कर्ता बन बैठे, ऐसा सोचने लगे कि हम सब कुछ कर सकते हैं, हम उज्ज्वल भविष्य का निर्माण खुद कर सकते हैं।
हद तो तब हो जाती है जब उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का आधार "धन" को समझ लिया जाता है और उस "धन" की बचत के लिए बच्चों को भी दाँव पर लगा देते हैं। अर्थात बच्चे पैदा करना भी आफत लगने लग जाए।
इसलिए अब्राहम मैस्लो के "hierarchy of needs" के पिरामिड में "self actualization" को टॉप पर रखा और बाद में मैस्लो को भी समझ आने लगा कि "self actualization" के भी परे "कुछ" है ।
सोक्रट्स भी वो ही समझा रहे थे कि
'The only true wisdom is in knowing you know nothing.'..
A mind can never know in his capacity what is beyond that .. what is that "कुछ" ? ...
उसको जानने की भी जिज्ञासा होने के लिए "self actualization" से ऊपर "self realization" को जानना पड़ेगा अर्थात "अध्यात्म" को समझना पड़ेगा ।
इसलिए "अध्यात्म" अतृप्त लोगों (unfulfilled desired people) का सब्जेक्ट हो ही नहीं सकता , इसके लिए तो सबसे पहले "संतुष्ट"(feel fulfilled) होना पड़ेगा ही पड़ेगा । तभी तो आगे सोच पाओगे ।
तभी वर्तमान समझ आने लगेगा , कि "वर्तमान" लीनियर "X-Y" प्लेन की बजाए "Z" प्लेन का expansion भी हो जाता है ।
जंहा वर्तमान की कोई सीमा ही नहीं है । ये ही वर्तमान महर्षि रमण का अनंत वर्तमान है जिसके बाहर हमें जाने की जरूरत ही नहीं है ।
अब सवाल जरूर आएगा "मन" में कि इस "वर्तमान" को कैसे महसूस करें ?
इसके लिए जरूरी है "आत्म अनुभव", यह किसी के कहने से या सुनने से नहीं होता है।
इसे अनुभव करने के लिए एक छोटा सा प्रयोग करते हैं।
लंबी सांस लेकर अपने पेट में भरो ताकि पेट बाहर निकलकर दिखने लगे।
अब उस सांस को छोड़ो, पूरी तरह से बाहर निकालो ताकि पेट पूरी तरह से पिचक जाए, जैसे मानो रीढ़ की हड्डी से सट गया हो।
अब 1 से लेकर 10 तक मन ही मन में काउंट करो, सांस को बाहर ही रोककर।
क्या अनुभव हुआ?
काउंटिंग के अलावा कोई और विचार मन में आया?
विचार कैसे रुक गए?
क्या कुछ समय के लिए संपूर्ण ध्यान काउंटिंग पर केंद्रित हो गया?
यह एक साधारण सा कुछ क्षणों के लिए विचार-शून्यता को अनुभव करने का एक प्रयोग मात्र है।
यदि एक क्षण को वर्तमान में जीना सीख लिया, तो फिर क्षण-क्षण को जोड़कर अनंत वर्तमान तक जिया जा सकता है। यही अनंत वर्तमान महर्षि रमण का Z-axis में expansion वाला वर्तमान है।
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