एक नए नजरिए से समझते हैं कि कैसे हम सबके अंदर हनुमान छिपे हुए हैं। तुलसीदास जी की हनुमान चालीसा में जिस तरीके से हनुमान जी का वर्णन किया है, उसी को आधार बनाकर समझने की कोशिश करते हैं। "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।" हनुमान जी की जय हो, जिनमें ज्ञान (आत्मबोध, विवेक) और गुण (साहस, करुणा, समर्पण, बल) का सागर हो। अपार गुण और अपार ज्ञान जिस सागर से प्राप्त होता हो। "जय कपीस तिहुं लोक उजागर।" कपीस को समझें तो वानर के अलावा इसका अर्थ होता है "ग्रहण करने की अपार शक्ति वाला स्वामी" और तीन लोक का मतलब शरीर, मन, चेतना। उजागर - किसी तथ्य को रोशनी में लाना। जय हो हनुमान जी की, जिन्होंने शरीर, मन, चेतना को अपार शक्ति प्रदान की हो और फिर उस जीवन को इस लोक में लाया गया। (अब ग्रहण क्या किया गया? सोचने वाली बात है।) "राम दूत अतुलितबलधामा।" Rama is the inner soul, then without exhale and inhale, the soul cannot stay in the body. So, it is a messenger of the soul and has immense power to keep this whole body alive to perform any kind of task. "अंजनी पुत्...
what I heard in deep silence I write it here