ज्यादातर मामलों में पारिवारिक झगड़ों का कारण सिर्फ और सिर्फ “रिएक्शन” होता है — एक त्वरित प्रतिक्रिया (quick reaction) जो क्रोध और आपसी कलह को जन्म देती है। जैसे हम बिजली के बल्ब हों — किसी ने बटन दबाया और हम जल उठे। बहुत दिनों तक सोचता रहा कि ऐसी प्रकृति हमारी क्यों बन गई? कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्वभाव का नाम दे दिया। लेकिन लगता तो नहीं कि यह मनुष्य-जाति का स्वभाव है। यदि यह स्वभाव होता तो मनुष्य को भी हिंसक जानवरों की तरह नुकीले नाखून, सींग या ऐसा कोई अंग अवश्य मिला होता, जो क्रोध से उत्पन्न हिंसा को सहारा दे सकता। लेकिन ऐसा है नहीं। इसका मतलब यह है कि यह एक तरीके से विकसित किया गया “व्यवहार पैटर्न” है। अच्छी तरह गौर करें तो पाएँगे कि जो जितना आधुनिक शिक्षा से “शुशोभित” (decorated) है, वही उतनी जल्दी रिएक्शन करता है। आधुनिक मेडिकल साइंस कहती है कि यदि किसी को बार-बार गुस्सा आता है, चिड़चिड़ापन बना रहता है, तो इसके पीछे शरीर में cortisol, adrenaline, testosterone, serotonin जैसे हार्मोन का असंतुलन जिम्मेदार होता है। मतलब कहीं न कहीं इन हार्मोनों का संतुलन उम्र के किसी पड़ाव पर बिग...
what I heard in deep silence I write it here