सोते समय देखा गया स्वप्न और जागते समय जो चल रहा है "वास्तविकता", दोनों में बहुत समानता है। सोते समय देखे जाने वाला स्वप्न जब तक नींद से नहीं जागो तो बिल्कुल सत्य मालूम होता है। स्वप्न अपने आप आता है, जैसे जीवन अपने आप मिलता है, स्वप्न के चारों तरफ का माहौल भी अपने आप तय होता है, जैसे जन्म के बाद परिवार, समाज, धर्म सब तय हो जाते हैं बिना आपकी permission के वैसे ही सपने में भी सब सेट हो जाता है। स्वप्नों में भी emotion होते हैं, जैसे जागते समय होते हैं, स्वप्नों की भी भाषा होती है, स्वप्नों में भी "कर्ता" होता है, स्वप्नों की दुनिया भी बिल्कुल जीवंत जैसी है। फ्रॉयड ने इसी दुनिया को समझकर मनोविश्लेषण करना शुरू किया, रोग का उपचार शुरू किया। लेकिन ये स्वप्न है, ये हमको तभी मालूम चलता है जब हम जाग जाते हैं, यदि कोई 2-4 दिन तक सोता रहे और स्वप्न की दुनिया में रहे तो उसे पता ही नहीं चलेगा कि वो स्वप्नों की दुनिया में है। मतलब एक बात तो तय है स्वप्नों की दुनिया है या वास्तविकता उसे जानने के लिए उस दुनिया से बाहर आना ही पड़ता है, अर्थात, उस दुनिया से बाहर निकलने पर ही मालूम च...
what I heard in deep silence I write it here