एक नए नजरिए से समझते हैं कि कैसे हम सबके अंदर हनुमान छिपे हुए हैं।
तुलसीदास जी की हनुमान चालीसा में जिस तरीके से हनुमान जी का वर्णन किया है, उसी को आधार बनाकर समझने की कोशिश करते हैं।
"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।"
हनुमान जी की जय हो, जिनमें ज्ञान (आत्मबोध, विवेक) और गुण (साहस, करुणा, समर्पण, बल) का सागर हो। अपार गुण और अपार ज्ञान जिस सागर से प्राप्त होता हो।
"जय कपीस तिहुं लोक उजागर।"
कपीस को समझें तो वानर के अलावा इसका अर्थ होता है "ग्रहण करने की अपार शक्ति वाला स्वामी" और तीन लोक का मतलब शरीर, मन, चेतना।
उजागर - किसी तथ्य को रोशनी में लाना।
जय हो हनुमान जी की, जिन्होंने शरीर, मन, चेतना को अपार शक्ति प्रदान की हो और फिर उस जीवन को इस लोक में लाया गया।
(अब ग्रहण क्या किया गया? सोचने वाली बात है।)
"राम दूत अतुलितबलधामा।"
Rama is the inner soul, then without exhale and inhale, the soul cannot stay in the body. So, it is a messenger of the soul and has immense power to keep this whole body alive to perform any kind of task.
"अंजनी पुत्र पवन सुत नामा।"
अंज धातु से बना शब्द अंजनी, और अंज धातु का एक मतलब होता है "दिव्य ऊर्जा"।
और यह दिव्य ऊर्जा आती कहाँ से है? सूर्य से... जिसे प्राण ऊर्जा के नाम से भी जानते हैं।
A combination of divine energy and air is the cause of Hanuman.
हमारा जन्म तभी संभव है जब दिव्य ऊर्जा और श्वास-प्रश्वास चलता रहे।
बिना पवन के श्वास-प्रश्वास संभव ही नहीं है।
हनुमान जी का राजा केसरी ने पालन पोषण किया। केसरी मतलब यह शरीर। यह शरीर श्वास-प्रश्वास को जन्म नहीं देता, लेकिन शरीर ही श्वास-प्रश्वास का पालन पोषण करता है।
क्या श्वास-प्रश्वास ही हनुमान जी का रूप है?
क्या श्वास-प्रश्वास में इतना बल है जो शरीर को वज्र जैसा बना दे ?
क्या इतना बल है जो शरीर को हवा में उड़ा दे ?
क्या इतना सामार्थ्य है जो कुमति नाश कर सुमति के साथ दिला दे ?
क्या इतना बल है जो शरीर को कंचन की तरह जगमगा दे ?
क्या इतना बल है जो संयमी बना दे ?
क्या श्वास-प्रश्वास का संतुलन रोग मुक्त रख सकता है ? ( हरे सब पीड़ा )
मन कर्म वचन को लय बद्ध कर सकता है ?
अष्टसिद्धि और नौ निधि दिला सकता है ?
जन्म मृत्यु से मुक्ति मिल सकती है ?
To find answers of all these questions lead to the path of "finding the truth" ..
Just not only find the answers , need to experience the answer , what I say or other say, don't go by words just experience and get your own answers .
Tulsidas Ji is such a divine soul and transcendent person who bring out this truth in couplets for easy memorizing so that generation to generation keep remember this as path of Moksha just by practicing exhale and inhale … Though he did not tell directly for practicing meditation but the secrets is hidden in his poetic couplets .
तुलसीदास जी ने जिस तरीके इस चौपाई बनाई उन्होंने "अंजनी पुत्र पवनसुत नामा" से पहले " रामदूत अतुलित बलधामा" लिखा , सोचने वाली बात है जन्म से पहले कैसे "रामदूत" बन सकते हैं .
When you try to understand the couplets you will find its happening in sequence a well organised sequence nothing is randomly written there .. if Tulsidas ji wanted then could have written this couplets in reverse order also.. but he did not , why ?
-- हरि ॐ तत् सत्
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