"डर" (Fear)
डर का इस्तेमाल करके कैसे करोड़ों कमाए जा सकते हैं? और इसे समझ जाओ तो मुक्ति की राह आसान हो जाती है।
फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब पर कोई भी ऐसा कंटेंट डाल दो जिससे डर लगने लगे, जैसे –
पैसे खोने का डर, नौकरी जाने का डर, बीमार होने का डर, समाज मिटने का डर, धर्म को खतरे का डर, चोरी का डर, अंधेरे का डर, काल्पनिक डर, देश से निकाले जाने का डर, टैक्स का डर, सरकार का डर, अधिकारियों का डर, एक्सीडेंट का डर, खाने में मिलावट का डर, मृत्यु का डर, भूतों का डर, भयानक जानवरों का डर … और भी बहुत से सारे डर।
फिर देखो कैसे लाइक्स और कमेंट्स की बाढ़ आ जाएगी।
ये सिर्फ़ कंटेंट के लिए ही applicable नहीं होता, बल्कि इसी डर से प्रॉडक्ट भी बेचे जाते हैं, सरकारें भी बनाई और गिराई जा सकती हैं। सरकारें ही नहीं, गृह युद्ध और विश्व युद्ध तक करवाए जा सकते हैं।
ऐसा होता क्यों है? दिमाग डर को इतना महत्त्व क्यों देता है?
इसका कारण जानने जाओगे तो एक नया रहस्य सामने आता है –
कैसे समाज, शिक्षा और परिवार बचपन से ही इस डर को पैदा करते हैं और यही डर आगे चलकर लोगों को manipulate करने का साधन बन जाता है।
डर का सबसे अच्छा साथी है "Attachment" (लगाव)।
The moment you start feeling attached to anything (self, money, person, family, society, country, religion, jobs, business etc.), fear starts to grow. The more you are attached, the more you fall into the trap of fear.
Without attachment there will be no fear … both travel together in life.
जिसने इस डर को जान लिया वो "महावीर" बन गया , जब लगाव (attachment) ही नहीं तो फिर कैसा और किसका डर..
इसीलिए महावीर को "वीतरागी" कहा गया।
वीतराग मतलब – जो राग और विराग (attachment and detachment) दोनों से ही दूर हो गया हो।
जब डर ही नहीं बचा तो फिर "वीर, अतिवीर, महावीर" — ये सारे नाम अपने आप ही सार्थक सिद्ध हो जाते हैं।
लेकिन हम समझना नहीं चाहते कि हम सब "महावीर" ही हैं, और अपने आपको डर में उलझाकर "कायर" बना बैठे हैं।
अपने आप ही हमने भ्रम (माया, illusion) अपने आस-पास खड़ा कर लिया है — डर का भ्रम।
और इस डर से मुक्ति बहुत आसान है। उसके लिए बस इतना जानना ज़रूरी है कि —
The moment you understand it's only fear due to illusion, that moment all smog gets clear and you are free from delusion and start travelling towards liberation (मुक्ति, मोक्ष)।
अब ये समझने के लिए या तो ध्यान ( अंतःकरण में झांकना) का सहारा लिया जाए या समर्पण का ,दोनो ही बड़ी आसानी से ये बात समझा सकते हैं ।
-- हरि ॐ तत् सत्
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